कंप्यूटर सेन्टर पर मिली चूत

कंप्यूटर सेन्टर पर मिली चूत

नमस्कार दोस्तो, मैं आप सबको Meri Sex Story Hindi में सुनाना चाहता हूँ।

पहले मैं अपने बारे में बताता हूँ। मेरा नाम समीर है, मैं होशंगाबाद में रहता हूँ। मैं 29 साल एक सिविल इंजीनियर हूँ।

ये बात उस समय की है, जब मैं जॉब कर रहा था और रूम लेकर भोपाल में रहता था।

रोजाना काम पर जाते समय एक लड़की मुझे देख कर मुस्कराती थी, वो दिखने में थोड़ी सांवली थी.. इसलिए मैं उसकी तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देता था। मैं रोज काम पर से आने के बाद पास ही के मार्केट में एक कंप्यूटर सेंटर में जाता था। मैं वहाँ पर अपने ऑफिस की रिपोर्ट मेल करने जाता था। वो भी अपनी सहेलियों के साथ वहीं उसी कंप्यूटर सेंटर पर कंप्यूटर सीखती थी और मुझे देखती रहती थी।

ऐसा एक सप्ताह तक चला। मैंने अपने रूम पार्टनर को बताया तो उसने मुझसे कहा- हो सकता है कि वो लड़की तुझसे चुदना चाहती हो.. इसलिए तुझे लाइन दे रही हो।

मैं रोज कंप्यूटर सेण्टर में सायं 6 बजे से 7 बजे तक ऑफिस का काम करता था।

एक दिन वो मेरे पास आई और उसने मुझसे हैलो बोल कर बात करते हुए मुझे अपना नाम नेहा बताया। मैं उस समय सिर्फ खाने-पीने और अपने काम में मस्त रहता था। मैंने भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

सर्दियों के दिन थे। एक दिन मुझे काम पर से आने में देर हो गई उस सेन्टर के सारे छात्र अपने घर चले गए, सिर्फ नेहा वहाँ अकेली बैठी थी। उसे अकेला देख कर मैं कुछ घबरा सा गया।

उसने मुझसे कहा- गुड इवनिंग..
इस पर मैंने भी ‘गुड इवनिंग’ कहते हुए उसे पूछ लिया- कैसी हो तुम?
उसने मुझे जवाब दिया- आप तो सब जानते हैं।

मैं समझ गया कि आज फंस गया। उसने उस दिन सलवार-कुरता पहना हुआ था। मैंने उसे कहा- तुम घर नहीं गई, मैं आज काम पर लेट आया इसलिए कल ऑफिस का काम कल करूँगा।

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मैं वहाँ से चलने लगा.. तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा- मैं आपसे प्यार करती हूँ और शादी करना चाहती हूँ।

वो मेरे गले से लग गई, उससे गले लगते ही उसकी गरम-गरम चूचियों ने मेरे अन्दर आग लगा दी। उसके स्तन बड़े-बड़े थे। मैं भी एकदम से गनगना गया। अब मैंने भी उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया और उसके स्तनों को दबाने लगा। उसके बाद मैंने उसकी पेंटी में हाथ दे दिया और उसकी बुर में उंगली डाल दी।

उसके मुँह से ‘आह.. आह..’ की आवाजें निकलने लगीं। मैंने उसकी चूत में उंगली की रफ़्तार तेज कर दी। वो और जोर-जोर से कामुक सीत्कार ‘आह.. आह.. उई उहं..’ करने लगी।

मैं उसके कपड़े उतारने लगा तो उसने मना कर दिया और कहा- बाकी सब शादी के बाद करेंगे।

यह सुनते ही मैंने उसकी चूत में जोर-जोर से उंगली करनी शुरू कर दी। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं। वो अपने को मुझसे छुड़ाने की कोशिश करने लगी मगर मैंने उसको छूटने मौका ही नहीं दिया और कुछ समय बाद उसकी चूत से पानी निकल गया।

उसके बाद मैं दोबारा से उसके होंठ चूसने लगा और उरोज़ दबाने लगा, वो दोबारा से गर्म हो गई। लेकिन इस बार मैंने उसे गर्म करके छोड़ दिया और कहा- अगर मुझसे सच्चा प्यार करती हो तो तुम्हें मेरे साथ सेक्स करना होगा, नहीं तो मैं जा रहा हूँ।

यह सुनते ही उसने गर्दन हिला कर हामी भर दी। फिर क्या था, मैं उस पर टूट पड़ा और उसकी सलवार और पेंटी को उतार दिया। उसके बाद उसकी बुर मेरे सामने थी। उसकी बुर पर छोटे-छोटे बाल थे। फिर मैंने अपनी पैंट और अन्डरवियर उतार दी। मेरा लम्बा और मोटा लंड उसके सामने था। उसे देख कर वो डर गई।

फिर मैंने उसे लिटा कर अपना लंड उसकी चूत पर रखा और हल्का सा धक्का मार दिया। चूत का साइज़ छोटा होने के कारण लंड फिसल गया।

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फिर नेहा ने लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर रखा और मैंने एक जोरदार धक्का लगाया और मेरा आधा लंड अन्दर चला गया।

नेहा की चीख निकल पड़ी, वो छटपटाने लगी। मैंने उसकी होंठों को अपने होंठों में भर लिया और चूसने लगा। लंड थोड़ा थोड़ा अन्दर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद एक और धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड अन्दर चला गया। इस बार नेहा रोने लग गई, उसकी चूत से खून बहने लगा।

मैंने उसको गले से लगा लिया और कुछ देर बाद धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू कर दिए, उसे मजा आने लगा। फिर वो भी साथ देने लगी और जोर-जोर धक्के मारने लगी। वो मुझसे जोर से लिपट गई और झड़ गई।

मैं अभी नहीं झड़ा था इसलिए एक पल रुकने के बाद अब मैंने उसकी चूत में जोर-जोर झटके मारने शुरू कर दिए। उसके मुँह से फिर से ‘आह.. आह.. उहं उहं..’ की आवाज निकलने लगी थी।

फिर मैंने लंड के झटकों की रफ़्तार को और बढ़ा दिया। उसकी चूत लाल हो गई और नेहा को बहुत दर्द हो रहा था।

अब तक नेहा तीन बार झड़ चुकी थी, मैं भी झड़ना चाहता था मगर मेरा वीर्य नहीं निकल रहा था। चूंकि नेहा की हालत ख़राब हो गई थी, घर्षण के कारण चूत में दर्द भी हो रहा था।

उसकी चूत बहुत गरम हो गई थी। मैं पसीने में नहा गया था। उस दिन काफी देर चुदाई करने के बाद मेरा वीर्य निकलने को हुआ तो मैंने लंड बाहर खींच कर उसके पेट पर माल निकाल दिया।

फिर नेहा ने जल्दी से कपड़े पहने और चली गई। कंप्यूटर सेण्टर के मालिक के आने का भी समय हो गया था।

तीन दिन बाद मैंने नेहा को अपने दोस्त के कमरे पर बुलाया जो कि कंप्यूटर सेण्टर के बिल्कुल नजदीक था। नेहा शाम के 5 बजे कमरे पर पहुँच गई। हम दोनों कमरे में अन्दर चले गए और मेरे दोस्त ने बाहर से कमरे को ताला लगा दिया ताकि किसी को शक नो हो।

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अब मैंने नेहा को अपनी बाँहों में भर लिया और दोनों एक-दूसरे के होंठों को चूसने में लग गए। मैं उसके मम्मों को दबाने लगा। नेहा को गरम होते देर न लगी और वो चुदने के लिए तैयार हो गई।

मैंने कंडोम निकाला और लंड पर चढ़ा लिया और नेहा की चूत में डालने लगा, मगर चिकनाई कम होने के कारण अन्दर नहीं गया। फिर मैंने पास रखी तेल की शीशी से तेल लेकर लंड पर लगा लिया। इसके बाद मैंने चूत में सुपारा फंसा कर एक तेज झटका मारा और मेरा आधा लंड उसकी चूत में अन्दर तक चला गया। कुछ पल रोक कर फिर से एक जोरदार झटका दिया तो पूरा का पूरा लंड चूत में घुसता हुआ अन्दर तक चला गया।

उसको हल्का-हल्का दर्द हो रहा था। कुछ ही पल बाद नेहा अपनी गांड को उठा कर साथ देने लगी और दोनों एक से बढ़कर एक झटके मार रहे थे कि उसका पानी

छूट गया। मैं जोर-जोर से झटके मार रहा था.. मगर पहले की तरह मेरा वीर्य नहीं निकल रहा था।

अब ज्यादा समय हो गया था, नेहा परेशान हो गई और उस जोर का दर्द होने लगा। उसने मुझे छोड़ने को कहा तो मैंने उसको छोड़ दिया और वो कपड़े पहन कर चली गई।

उस दिन के बाद उसने मुझे कभी भी अपनी चूत के दर्शन नहीं कराए। इस प्रकार मेरी और नेहा की प्रेम कहानी का अंत हो गया।

उसके बाद मैं डॉक्टर के पास से टेस्ट करवाया और पाया गया कि मैं जो दवा शरीर को मजबूत बनाने के लिए खाता था.. उसकी वजह से यह आज तक हो रहा है। इसलिए अभी मैं

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