कोलेज की रंडियां

कोलेज की क्लास बंक कर के मैं, अंजलि, राघव और बिंदिया फिर से वही खेतों की हवा खाने के लिए निकल पड़े. बिंदिया एक बड़े बाप की बेटी हैं जिसके पास खर्च करने के लिए पैसे और चुदवाने के लिए चूत हमेशा रहती हैं. बिंदिया की ख़ास सहेली हैं अंजलि जो बिंदिया की चुदाई में या तो हाजिर होती हैं या उसे पता होता हैं की बिंदिया आज किस को फांसने वाली हैं. बिंदिया के अभी हम शिकार हैं मैं और मेरा खास दोस्त राघव. वैसे यहाँ शिकार बनने पर चोदने के लिए चूत और खर्च करने के लिए पैसे बहुत मिल रहे हैं. पिछले डेढ़ महीने से बिंदिया को हम आज करीब 20वी बार चोदने के लिए ले के जा रहे हैं. उसी की गाड़ी में उसकी चूत लेने के मजे ही कुछ और हैं. अंजलि वैसे बिंदिया की ख़ास सहेली हैं लेकिन वो बिंदिया के पैसो के लिए उसके गुलाम से कम नहीं हैं. अंजलि की गांड भी मस्त मोटी हैं क्यूंकि जितनो को बिंदिया रौंदती हैं उतनो के ही लंड अंजलि की चूत म भी जाते हैं.

दोनों बड़ी रंडियां हैं

अंजलि मेरे साथ पीछे की सिट पर थी और आगे राघव और बिंदिया थे. अंजलि ने बड़े गले वाली टी-शर्ट पहनी थी बिलकुल बिंदिया की तरह ही. रास्ता जैसे ही थोडा सुमसाम हुआ मेरे हाथ धीरे से अंजलि की जांघ पर चले गए. वो हंस पड़ी और बोली, बिंदिया यह दोनों सच में बड़े ही चुदासी हैं. खेतों के आने के पहले ही चूत ढूंढने लगे हैं,

बिंदिया ने हंस के पीछे देखा और वो बोली, लंड चुदाई के लिए जितना आतुर हो चुदाई उतनी ही मजेदार होती हैं. क्यूँ राघव तुम क्या कहते हो?

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राघव ने अपनी पतलून की ज़िप खोली और वो बोला, आतुरता तो यहाँ भी हैं बेबी.

बिंदिया ने राघव के लंड को देखा और फिर गियर के डंडे की जगह उसे पकड लिया. मैंने अंजली की छाती पर अपने हाथ रख दिए और मैं उसे जोर जोर से दबाने लगा. अंजलि के हाथ भी अब मेरे लौड़े पर आ गए और वो उसे पेंट के ऊपर से ही दबाने लगी. मेरा लौड़ा एकदम टाईट हो चूका था, चुदाई के लिए एकदम रेडी. अंजलि ने ज़िप खोली और उसे बहार निकाला. मेरा लंड तन के पूरा 8 इंच का हो गया था. अंजलि उसे देख के पगला सी गई और उसने अपने हाथ से लंड और उसके निचे के टट्टे पकड के दबाये. मैंने उसके होंठो को अपनी नजदीक खिंच लिया और मैं उसे किस करने लगा. अंजलि मेरे लौड़े को मरोड़ रही थी और उसकी साँसे मेरे नाक के ऊपर टकरा रही थी.

किस को तोड़ते हुए मैंने अंजलि का मुहं अपने लंड पे रख दिया. और यह कोलेज की रंडी ने मेरे लंड को सीधे ही अपने मुहं में डाल दिया. वो गले तक लंड को भर के एकदम से चूसने लगी. अंजलि का लंड चूसने का स्टाइल इतना सेक्सी था की कोई भी इन्सान पगला जाएँ. मैंने उसके बालों को अपने हाथ में लिया और उसे लंड के ऊपर आगे पीछे होने में बाल खिंच के हेल्प करने लगा. अंजलि की साँसे जोर से चलने लगी थी.

उधर चुदाई के दो और प्यासे राघव और बिंदिया भी लग गए थे काम में. बिंदिया वैसे तो आगे देख के ड्राइव कर रही थी लेकिन उसका हाथ राघव के लौड़े को ,मल भी रहा था. राघव बिच बिच में बिंदिया के चुन्चो को दबा लेता था. इधर अंजलि ने मेरे लंड को चुदाई करने पर जैसे की मजबूर सा कर दिया था. मुझे लगा की अब तो चूत की चुदाई करनी ही पड़ेंगी. मैंने अंजली को उपर उठाया और उसकी टी-शर्ट को सर के उपर से निकाला. अंदर की ब्रा उतारने का काम अंजलि ने ही निपटा दिया. मैंने अपनी पतलून जो घुटनों तक थी उसे पकड के खिंच लिया. अंजलि ने मेरी अंडरवेर निकाल फेंकी. उसका इरादा फिर से मेरे लंड को चूसने का था लेकिन मेरा मन चुदाई के लिए बन चूका था. मैंने उसे पकड के उसकी स्कर्ट को थोडा साइड में किया. अंजलि की चूत उसकी पेंटी के पीछे छिपी पड़ी थी. मैंने उसकी पेंटी उतारी नहीं बल्कि उसे साइड में कर के चूत को खुला कर दिया. अंजलि की हॉट चूत पर मैंने अपनी थूंक वाली ऊँगली लगा दी और उसके मुहं से सिसकी निकल पड़ी.

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तभी बिंदिया ने पीछे मुड़ के देखा और बोली, अरे बाप रे यह लोग तो चुदाई करने की कगार तक जा पहुंचे हैं, मैं धीरे से ड्राइव करती हूँ.

राघव बोला, नहीं मैं ड्राइव कर लेता हूँ तुम मेरी टांगो के बिच में बैठ के मेरा लौड़ा चुसो.

कार में अंजलि की चुदाई

बिंदिया ने गाडी साइड में की और राघव अब ड्राइविंग सिट पर आ गया. राघव ने जैसे कहा था वैसे ही बिंदिया उसकी टांगो के बिच में जा बैठी. राघव का लंड अब उसके मुहं में था जिसे वो जोर जोर से चूसने लगी थी. राघव आँखे बंध कर के बिंदिया की लंड चुसाई का मजा ले रहा था. उसने गाडी एकदम स्लो रखी थी ताकि किसी को भी तकलीफ ना हों.

अंजलि की चूत में थोड़ी देर ऊँगली करने के बाद मैंने अपना लंड एक हाथ से पकड़ा और उसे उपर बैठने के लिए इशारा किया. अंजलि ने अपने हाथ में थूंक ले के चूत पे लपेड दिया और फिर एक हाथ से मेरा लंड पकड के वो मेरी गोदी में आने लगी. उसने लंड को चूत के छेद पर सेट किया और फिर धीरे से लंड को अपनी चूत में लेते हुए गोद में बैठ गई. उसकी चिकनी और गरम चूत में लंड जाते ही मुझे असीम आनंद का अहसास होने लगा.

थोड़ी देर में अंजलि की चूत में मेरा लंड पूरा चला गया और उसने अपने हाथ को वहां से हटा लिया. उसने दोनों हाथ अब मेरे कंधो के ऊपर रख दिए और वो धीरे धीरे ऊपर निचे होने लगी. चुदाई स्टार्ट हो चुकी थी और मेरा लंड उसकी चूत में धीरे धीरे अंदर बहार होने लगा था. राघव उधर मजे से बिंदिया के ब्लोजोब का मजा लुट रहा था….!

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दोनों लड़कियों की असली चुदाई अगले भाग में भी जारी रहेंगी….!

Aug 30, 2016Desi Story

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