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क्या ऐसा ही होता है प्यार का पहला एहसास

क्या ऐसा ही होता है प्यार का पहला एहसास
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प्यार एक पहला एहसास..

रात के 11 बज रहे थे.. अपने हॉस्टिल के बेड पे लेता मैं इन दो दीनो मे हुई अंजान घत्नाऊ के बड़े मे सोच रहा था..

मैं शिवम एक कॉलेज का स्टूडेंट जिसने कल ही अदमस्न लिया था… आते ही रागिंग भी हुई.. ये बात महत्वपूरे्णा नही.. सबसे अहम बात तो ये थी.. कल से ही उसके दिल ने उसे धोका दे दिया था….

” एक्सक्यूस मे!!! पेन होगा आपके पास?? वो मुझे अदमस्न फॉर्म भरना था..”

उस सुंदर सी मनमोहक आवाज़ ने दिल मे एक अजीब तरह की हलचल पैदा कर दी थी..
पेन हाथ मे पकड़े मैने जैसे ही अपनी नज़रो को पीछे घुमाया मेरी उस शाकस पे नज़र पड़ी..

मैं उसे देख अपना अस्तित्वा भूल चुका था.. बाला की खूबसूरात.. सफेद सा गोल मटोल चेहरा.. सयद हल्के मेकप से धक्का था.. वो नैन नक्श.. काजल से परिपूर्ण.. आँखे ऐसी जो किसी कतर से कम ना थी… बाल कमर तक आते हुए.. जो खुले होने के बावजूद अच्छी तरह से समेटे हुए थे..

मैं तो बस उसे ही देख रहा था.. उसने दोबारा पूछा..
” एक्सक्यूस मे!! मुझे थोड़ी देर के लिए अपना पेन दे सकते है.. मैं अभी लौटा दूँगी.. ”
मैं कुछ भी बोलने की स्तिति मे नही था पर मेरे हाथ ने खुद ही हरकत की और एज बढ़ गया..

उसने मेरे हाथ से पेन ले लिया पर इस बीच उसकी तर्जनी उंगली ने ज्यो ही मेरे जिस्म को छुआ एक शिहरन सी दौड़ गई पूरे जिस्म मे.. इस एहसाश ने मेरे अंदर एक अलग ही भावना पैदा कर दी थी.. मैं थोड़ी देर उसे वही खड़ा देखता रहा.. जब तक मेरे पापा मुझे बुलाने ना आए!!
“बेटा कैसा लगा कॉलेज??
मैं क्या बताता उन्हे मुझे कुछ सुध ही नही थी थोड़ी देर पहले के सभी दृश्या मेरी आँखो मे थे ही नही.. था तो बस उसका एक मनमोहक सा चेहरा.. कानो मे उसकी आवाज़.. जो मेरे दिल तक एक दिलकश एहश्ाश जगा रही थी..
” चलो बेटा मैने ऑफीस मे सारे डॉक्युमेंट्स दे दिए ह.. तू आज से इस कॉलेज का स्टूडेंट बन गया है..अब चल अपने होस्तल का रूम भी डेक्ज़ ले.. 24 नो. कमरा है तेरा..”

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पापा की बातों ने मेरी उस तंद्रा को थोड़ा तभी मा की आवाज़ आई.. ” तू कहा खोया है.. चल ना ”
मैने देखा वो दोनो पहले ही मुझसे दो कदम एज बढ़ चुके थे..
अपने ख्यालू के एक झटका देकर मैं भी एज को बढ़ चला.. पर मेरे साथ एक तस्वीर भी चल रही थी जो सयद अब मेरे जहें मे समा गई थी..

मैं यहा आज कॉलेज मे रहने आया था.. पापा की कॉसिषो ले चलते और थोड़ी बहुत मेरी पढ़ाई की वजह से मैं आज इस रिप्यूटेड कॉलेज मे था..

पापा और मा आज मुझे यहा चोदने आए थे.. उन्हे बहुत ख़ुसी थी मुझे आज ईये मुकाम पर देख कर.. हर माता पिता को होती है..

मैं खुद भी खुश था उन्हे खुश देखकर.. पर अब तो सारी ख़ुसी उस एक एहसास के एज फीकी लग रही थी.. क्या था ये.. ऐसा तजुर्बा तो अभी तक की अपनी जिंदगी मे मुझे नही हुआ था.. ये एक नया अनुभव था जिस से मैं आज तक अच्चुटा था…

मा पापा ने पूरा कॉलेज अच्छे से देखा और वो मुझे वही अच्छे से रहने की सलाह दे कर चले गये..

रात को रॅगिंग भी झेली पर मैं बिल्कुल चुप सा सब कुछ सह गया.. उन्होनो भी मुझे एक सीधा और सांत लड़का समझ कुछ ज़यादा तंग नही किया..
वो रात भी कैसे ख्यालू मे ही गुज़री मुझे इसका आभाष नही..

अगले दिन से क्लासस स्टार्ट हुई.. मैने जाकर एक सीट चूज़ की मिड्ल मे..

थोड़ी देर बाद और भी कई स्टूडेंट्स आ गये.. एक मेरी बगल मे ही बैठा. उसने अपना हाथ एज बढ़ाया..

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” है मैं रवि.”

” मैं शिवम ”

ऐसे ही थोड़ा परिचय हुए.. तभी मेरी नज़र क्लास के गाते पे पड़ी.. मैं इस चेहरे को अच्छी तरह जानता था उस आँखो को अच्छे से पचानटा था.. वो एक नज़र क्लास पे डालती है.. शायद अपने लिए कोई सीट ढुंड. रही थी.. तभी उसकी नज़र मुझ पे पड़ती है.. इस एक पल के नज़रो के टकराव ने ही मेरे दिल मे एक हलचल सा पैदा कर दिया था.. सयद वो भी मुझे पहचान चुकी थी..

वो एक लड़की के पास जाकर बैठ गई जिसके बगल मे सीट खाली थी.. उसकी सीट भी मेरे सीध मे ही थी.. उसने फिर से एक नज़र मुझे देखा.. सयद तसलीी कर रही हो ये मैं ही हू ना..

ऐसे ही क्लासस स्टार्ट हुई.. पर बीच बीच मे हमारी नज़रे आपस मे टकरा जाती. मैं खुद भी नही जानता कैसे पर जब भी वो मेरी ओर देखती मुझे एहसास हो जाता उसकी नज़रू का सयद मेरे शरीर का उन नॅज़ारो से परिचय हो गया था..

ऐसे ही रेससएस हुई सभी कंतीन की तरफ जा रहे थे… पर मेरी ये बचपन से आदत बन गई थी.. मैं लंच मे भी क्लास मे ही रहता था.. बचपन मे तो पैसे भी नही होते थे पास मे.. सयद इसी वजह से ये आदत लग गई..
उसने एक नज़र मुझपे डाली पर मेरी कोई हलचल ना पा कर शायद उसे भी महसूस हो गया मैं बाहर नही जाने वाला..
वो भी रुक गई थी.. सभी जा चुके थे.. खुद को उसके साथ अकेला पकड़ एक सूर्रोर सा हो रहा था उस जिस्म मे..अचंक ही उसने कहा…

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” है.. पहचाना!! वो कल हम मिले थे..”
उसने अपना हाथ एज बढ़ते हुए कहा

” ऑश हां न.. वो याद ह मुझे..”
मैं भला कैसे भूल डाकता था.. इन नज़रो को जिसने पूरी रात बेचैन किया था मुझे
” मेरा नाम काजल है.. ”

” मैं शिवम.. ”
हॅंड सके करते हुए हमने खुद को इंट्रोड्यूस किया..
” वो मैं तुम्हारा पेन आज नही ले आ पाई कल भी तुम कही चले गये थे मैने डुँदा था.. पर तुम मिले ही नही.. ओर आज मैं सयद उसे अपने टेबल पर रख आई हू.. सॉरी.”

” क्क्कोइइ बात नही तुम उसे रख लो ”

” नही मैं कल ला दूँगी ”

” कोई ज़रूरात नही ह… मेरे पास और भी पेंस है.. एक गिफ्ट समझ कर ही रख लो आस आ फ्रेंड..”

” हुउऊंम… फ्रेंड … चलो ठीक है आज से फ्रेंड..”

तभी ब्रेक भी ख़त्म हो गया.. सभी स्टूडेंट्स आने लगे हम वापस अपनी सीट्स पर आ गये..

पूरी क्लासस मे हमारी नज़रे कई दफ़ा बस एक दूसरे को ही देख रही थी..

क्लासस ख़त्म हुई हम बड़े बोझिल से अपनी अपनी दोर्मेतरी मे चले गए..

रास्ते मे भी वो अपने साथ बैठी उस लड़की से बातों के बीच बार बात मुझे ही देख रही थी..

रात को मेस मे हमारी वापस से मुलाकात हुई… उसे देख एक अजीब सा सुकून मिला था मुझे जिसे बयान करना नामुमकिन है.. उसे देख कर मुझे भी लगा वो भी सयद वही अनुभव कर रही थी.. जो मैं कर रहा था..

ऐसे ही ये रात भी आगाई जब मैं अपने बिस्तर पे पड़ा ये सोच रहा हू..

” क्या ऐसा ही होता है प्यार का पहला एहसास&

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