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पत्नियों की अदला बदली – Desi Sex KhaniyaDesi Sex Khaniya

दोस्तो, मेरा नाम आनंद है और मैं नाईट डिअर की कामुक कहानियों का नियमित पाठक हूँ। मेरी उम्र 23 साल है मेरी कहानी मेरे घर की ही है जिसमें मेरी बीवी की चुदास की कहानी है।मेरी शादी को 2 साल हो गए हैं, मैं एक जॉब करता हूँ जिसमें मुझे अच्छी आमदनी है।

मेरी बीवी का कद 5’4” है और वो 21 साल की है, वो दिखने मैं गोरी और बहुत सुंदर है, जिसे देखकर कोई भी मर्द ‘आँहें’ भरने लगता है.
उसकी गाण्ड बहुत गोल है जो मस्ती से लचकती है और उसके दूध भी बहुत ही उठे हुए गोल-मटोल हैं। जैसे वो कोई हिरोइन हो।

उसे चुदाई की बहुत चाहत है.. वो मुझसे हमेशा ज़्यादा चुदाई की मांग करती रहती है।
उसकी चूत भी हमेशा रस से भरी रहती है।

मेरा घर एक बहुमन्जिली इमारत में है, जिसमें और भी कई लोग रहते हैं। हमारे फ्लैट के सामने एक फैमिली रहती है जिसमें दो शादीशुदा जोड़े रहते हैं उनका नाम जीतेन्द्र और निधि है। उनका अक्सर हमारे घर आना-जाना होता रहता है और उसकी बीवी मुझे लाइन मारती है, वो बहुत ही मस्त माल है।

कभी-कभी मैं भी उसको आँख मार देता हूँ, पर क्या करें.. इधर मेरी बीवी और उधर उसका पति.. बड़ी परेशानी थी।

ऐसे ही दिन गुजर रहे थे एक रोज हमने अपने घर मेरी बीवी सोनल के जन्मदिन पर एक पार्टी रखी, उसमें हमने उनको भी बुलाया।

वो लोग आए और बैठे, मेरी बीवी पानी लाई तो उसने टेबल पर पानी रखा और झुकी.. तो जीतेन्द्र मेरी बीवी के दूधों की ओर झाँकने लगा।
क्योंकि सोनल बहुत बड़े गले का ब्लाउज पहनती है।

हालांकि सोनल ने इस बात को देख लिया था तब भी उसने कुछ नहीं कहा, वो चली गई।

फिर हमारी बातें होने लगीं और खाने-पीने लगे, फिर म्यूज़िक लगा कर हम डान्स करने लगे।

तभी जीतेन्द्र मेरी बीवी का हाथ पकड़ कर उसकी कमर में हाथ डाल कर डान्स करने लगा।

मौका देख कर मैं भी उसकी बीवी को पकड़ कर नाचने लगा और हम दोनों एक-दूसरे से लिपट रहे थे और उधर मेरी बीवी के मम्मे उसकी छाती से टकरा रहे थे, इधर मैं भी निधि की पीठ पर हाथ फेर रहा था।

इतने में अचानक लाइट चली गई और मौका देखकर मैं निधि को चूमने लगा.. हम दोनों होंठों से होंठों को मिला कर चुम्बन करते हुए एक-दूसरे से लिपटे जा रहे थे।

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मैं उसके मम्मों को दबा रहा था।

कमरे में अंधेरा होने के कारण जीतेन्द्र कह रहा था- बिजली के आने तक डान्स करते रहो..

तो फिर हम लगे रहे.. किसी को कुछ नहीं दिख रहा था।

ऐसे में मैंने निधि के ब्लाउज का एक बटन खोल दिया और उसके मम्मों को दबाने लगा, फिर होंठ चूसने लगा और पूरा ब्लाउज खोल दिया।

जीतेन्द्र और मेरी बीवी के बीच क्या हो रहा था.. मुझे नहीं पता था।

मेरा लंड खड़ा होने की वजह से मुझे सिर्फ सोनल का भरा हुआ मादक बदन महसूस हो रहा था।

अचानक लाइट आ गई और हम घबरा गए..
पर पलट कर पीछे का सीन देखा तो दंग रह गए।

जीतेन्द्र मेरी बीवी का ब्लाउज और साड़ी उतार कर उसके मम्मों से खेल रहा था।
इधर मेरे हाथ भी उसकी बीवी के मम्मों पर थे।

हम चारों एक-दूसरे को देख कर चुपचाप खड़े रहे।

अचानक जीतेन्द्र हंसने लगा और बोला- अरे भाई आनंद.. रुक क्यों गए.. शर्म छोड़ो और एंजाय करो..

तो मैंने भी कहा- हाँ.. हमें रुकना नहीं चाहिए.. फुल मस्ती करो यार..

हमारी चुदक्कड़ बीवियों ने भी कहा- हाँ.. यार.. आज कुछ नया हो जाए।

वे जोर-जोर से हंसने लगीं।

बस फिर क्या था.. खेल शुरू हो गया।

जीतेन्द्र ने मेरी बीवी का पेटीकोट भी उतार दिया और सोनल सिर्फ़ पैन्टी में खड़ी थी और किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।

तो जीतेन्द्र ने कहा- यार कहाँ छुपा रखा था ये मस्त माल से भरा हुआ जिस्म.. जिसे हर मर्द चोदना चाहता है।

मैंने कहा- हाँ जीतेन्द्र.. मेरी बीवी को बहुत अधिक चुदने की इच्छा है..

तो उसने कहा- मेरी बीवी भी दूसरे मर्द का लंड लेना चाहती है।

सोनल ने कहा- हाँ यार.. एक लंड से चुदवा-चुदवा कर बोर हो गए हैं… आज मौका है.. कुछ नया करने का.. लेट’स एंजाय..!

मैंने निधि के पूरे कपड़े उतार दिए और वो नंगी खड़ी थी।

तभी मैंने जीतेन्द्र से कहा- यार निधि का बदन तो आग जैसा है.. एकदम गर्म और मादक.. सुंदर.. माल।

फिर हम सभी पूर नंगे हो गए और कमरे में चले गए।
वहाँ एक ही बिस्तर पर दोनों औरतों को लिटा कर एक-दूसरे की बीवी की चूत का रसपान करने लगे।

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मेरी बीवी सोनल ने अपनी सुंदर जांघें ऐसे फ़ैलाईं जैसे रंडी अपनी चूत को ग्राहक के आगे फैलाती है। जीतेन्द्र उसकी रसीली चूत को चूसने लगा तो वो अजीब सी सिसकारियाँ लेने लगी।

इतने में मैं भी चुसाई करने लगा तो दोनों की चूतों ने पानी छोड़ना चालू कर दिया और हम करीब 20 मिनट तक चूसते ही रहे..

इस चुसाई से दोनों रंडियों ने दो बार पानी छोड़ा।

फिर दोनों ने एक साथ ही कहा- हमें भी तुम्हारा लंड चाहिए.. हमें लंड चूसने दो।

दोनों ने लंड चूसना चालू किया तो हमारे लंड खड़े हो गए।

मेरा लण्ड जीतेन्द्र के लंड से लंबा था मगर जीतेन्द्र का लंड मेरे लंड से बहुत मोटा था।

मेरी बीवी बहुत खुश हुई कि आज उसकी मोटे लंड की तमन्ना पूरी होगी।

फिर हमने दोनों को लिटा कर उनके ऊपर आ गए और उनके होंठ चूसने लगे फिर धीरे-धीरे एक-एक मम्मे को चूसने लगे और दोनों टाँगों को कंधे पर रख कर गाण्ड का भी रस लेने लगे।

हमारी बीवियाँ बहुत तड़प रही थीं.. उन्होंने कहा- जल्दी करो और अपना लंड डालो।

तो सबसे पहले जीतेन्द्र ने मेरी बीवी की चूत पर लंड रखा और धक्का मारा तो मेरी बीवी दर्द से चिल्लाई- आराम से डालो..
तो लौड़े का सुपारा ही चूत के मुँह में अन्दर गया फिर और धक्का मारकर पूरा लवड़ा अन्दर कर दिया तो सोनल चिल्लाई और कहा- थोड़ा रूको…

इधर मैं अपना लंड निधि की चूत में डालने लगा और धीरे-धीरे पूरा लौड़ा डाल दिया।
फिर हमने धक्के लगाने चालू किए और हम एक-दूसरे की बीवियों को बहुत जोरों से चोदने लगे।

इसके बाद वो दोनों ज़ोर-ज़ोर से साँसें ले रही थीं ‘ऊ..आअहह और ज़ोर से करो.. निकाल दो.. मेरी चूत का रस.. पी लो इसको जानेमन.. कितने दिनों से नए लंड के लिए तरस रही है.. दे दो मुझे अपना पूरा लंड.. और लूट लो मेरी जवानी…’

यह मेरी बीवी की आवाज़ थी।
वो ज़ोरों से चिल्ला रही थी।

तभी दोनों छिनालों ने अपना चूत-रस उगल दिया और हमसे लिपट गईं लेकिन हमने उन्हें चोदना नहीं छोड़ा..
हम बदस्तूर चुदाई में लगे रहे और कुछ देर बाद हम दोनों उनकी चूत में अपना लंड-रस उगल कर उन्हीं के ऊपर ढेर हो गए और ज़ोर-ज़ोर से साँसें लेने लगे।

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फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों ने एक-दूसरे की आँखों में देखा और उन दोनों चुदासी छिनालों को पलट कर कुतिया बना दिया और उनकी गाण्ड चाटने लगे।
वो दोनों गरम फिर से हो गईं।

फिर जीतेन्द्र ने मुझसे कहा- यार आनंद पता है.. मेरी बीवी को गाण्ड मरवाने का बहुत शौक है।

तो मैंने कहा- मेरी बीवी इस मामले में तो पूरी रंडी है.. वो किसी छिनाल की तरह गाण्ड में लौड़ा डलवा लेती है।

फिर हम शुरू हो गए.. जीतेन्द्र ने मेरी बीवी सोनल की गाण्ड पर लंड टिका कर एक जोरदार धक्का मारा तो सोनल चिल्ला पड़ी और बोली- ओए.. धीरे-धीरे डाल.. तुम्हारा लंड मेरे पति से बहुत मोटा और दमदार है.. ह्य… मुझे तुम्हारा बहुत पसंद आया है..

फिर जीतेन्द्र ने पूरा लंड सोनल की गाण्ड में डाल दिया और चोदने लगा।

इधर मैंने भी निधि की गाण्ड मारना चालू कर दी और दोनों फिर से चुदाई करने लगे।

हम चारों पसीना-पसीना हो रहे थे और इन दोनों छिनालों के मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकल रही थीं।

मेरी बीवी चिल्ला रही थी- अरे मेरे प्यारे जीतेन्द्र काश.. मैं अपनी सुहागरात तुम दोनों से एक साथ चुदवा कर मनाती.. तो मेरे लिए वो यादगार बन जाती।

तो जीतेन्द्र ने कहा- अरे मेरी रांड रानी.. अब तो मैं यहीं हूँ और रोज तेरी सुहागरात तेरे ही बिस्तर पर तुझे चोद कर मनाया करूँगा।

मैंने भी उसकी बीवी से कहा- जीतेन्द्र मेरे घर में सोएगा और मैं तुम्हारे घर में तुझे रात भर चोदूँगा।

फिर हमारे शेर अकड़ने लगे और हम दोनों चरम सीमा पर पहुँचने लगे।

हमने एक साथ अपना रस उन दोनों की गांड में डाल कर उनकी पीठ से लिपट गए और वहीं बिस्तर पर लेट गए।

अब हम चारों बहुत थक चुके थे और पता ही नहीं चला कि कब हमारी नींद लग गई।

फिर सुबह रविवार था.. हम 9 बजे उठे और देखा कि सब नंगे ही सो गए थे और किसी ने कुछ नहीं पहना।

दोनों औरतों के छेदों से हमारा पानी निकल रहा था और हमने फिर एक बार चुदाई की और नहाने चले गए।

उस दिन खाना खाकर फिर दिन भर चुदाई करते रहे।

अब मैं और जीतेन्द्र रोज की तरह बीवियाँ बदल कर चुदाई करते हैं।

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