मेडम की गांड में लंड

बात उन दिनों की हैं जब मैं अपने बी.एड की तैयारी में मशगुल था. सारे सीनियर अध्यापक साले अपने काम भी हम से करवाते थे, लेकिन मज़बूरी के लिए हम सब कुछ कर लेते थे. मैं वैसे सुनीता नाम की एक सेक्सी अध्यापक के निचे काम कर रहा था जो बहुत ही अकडू और पूरी रंडी थी. उसे सब काम समय पर और साफ़-सुथरा चाहियें होता था. मैं काम तो कर लेता था ठीकठाक फिर भी वो बेन्चोद उसमे कोई ना कोई नुस्ख निकाल देती थी. मन तो करता था की साली को पकड के उसकी गांड में लंड दे दूँ…..!!! तब मुझे थोड़ी पता था की उसकी गांड में मुझे लंड देने का सच में सौभाग्य प्राप्त होगा…..!!!

एक दिन सुनीता ने मुझे अपने केबिन में बुलाया और पूछा की क्या मैं बी.एड. में अच्छे नंबर पाना चाहता हूँ, कौन गधा होगा जो ना कहेंगा. मेरे हाँ कहते ही उसने मुझे कहा की वैसे लोग 50 हजार के ऊपर ही लेते हैं लेकिन मैं जो ठीक समझू वो दे दूँ. मेरी गांड फट गई. साला 50 हजार तो मैं कहाँ से ले के आता. वैसे भी बाबूजी ने मुझे बी.एड. तक पढाया वो उनका अहेसान था, मेरे दो भाई और थे जिनके ऊपर बाबूजी को कम से कम लागत हुई थी और वो दोनों उन्हें काम में मदद करने लगे थे…! मैंने सुनीता मेडम को अपनी दास्ताँ सुनाई और वो थोड़ी पिघली. उसने मेरी तरफ ध्यान से देखा और बोली, तुमने खेतो में काम किया हैं कभी..? लगता तो नहीं हैं वैसा…? मैंने कहा, हाँ मैंने काम किया हैं खेतों में कितनी बार. और उसे सबूत देने के लिए मैंने जैसे ही अपनी शर्ट के बटन खोल के उसे अपने पेट के ऊपर पड़ी मसल्स मार्क्स दिखाई, उसकी जबान से लाळ टपकने लगी. वैसे मैं पतला था लेकिन मेरा एक एक मसल सुलझा हुआ और परफेक्ट शेप में था. मेडम को क्या पता गांड में पसीना लाना पड़ता था मसल बनाने में.

मेडम मेरी बोड़ी देख के जैसे की बावरी हो गई, उसे क्या पता की हरियाणा के लौंडे होते ही हैं मजबूत. मेडम अपनेआप को बिलकुल रोक नहीं पाई और उसने अपना हाथ मेरे सिने के ऊपर फेरा और वहां निकले हुए छोटे छोटे बालो को अपनी उंगलियों में लिए. उसने तुरंत अपने हाथ को हटा दिया. मैंने भी फट से बटन बंध कर दी. मेडम बोली, तुम तो सही मैं ही-मेन हो….मैं एक शर्त पर तुम्हारे पैसे छोड़ सकती हूँ…तुम्हे एक बार मेरे साथ सोना पड़ेंगा…!!! साला मेडम की गांड में और चूत में शायद मेरे ह्यूष्टप्यूष्ट शरीर को देख के चुदाई की खुजली होने लगी थी. वैसे मेरे लिए भी यह सौदा ठीक ही था. चूत की चूत और 50 हजार की बचत. मेडम ने एक कागज के ऊपर अपना एड्रेस लिख के दिया और मुझे बोला की सन्डे के दिन सुबह 11 बजे मैं उनके घर पहुँच जाऊं.

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सन्डे का मैं भी बेसब्री से इन्तेजार करने लगा था, सन्डे आया और मैंने अपनी फेवरेट जींस और टी-शर्ट डाली और मेडम के घर तरफ जाने के लिए सिटी बस पकड ली. मेडम का घर ढूंढने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई क्यूंकि उसकी सोसायटी में केवल 5 घर थे और सभी पे नेमप्लेट लगा था. प्रोफ़ेसर सुनीता पांडे, नेम प्लेट पढ़ते ही मैंने घंटी बजाई, 20 सेकण्ड के बाद दरवाजा सुनीता मेडम ने ही खोला. वोह एक पारदर्शक साडी में सज्ज थी. साडी हलकी थी जिसे घर में पहना जा सकता था. अंदर आते ही मैं सोफे के ऊपर बैठा और मेडम ने मुझे पानी ला के दिया. मेडम जब खाली ग्लास ले के जा रही थी तब में उसकी गांड में पड़ती मटक को देख रहा था. मेडम की गांड बहुत ही सेक्सी थी और मैं मनोमन सोच रहा था की मेडम एक बार मुझे गांड में मस्ती का मौका दे दे तो बहुत मजा आ जाएगा. लेकिन मेडम को गांड में लेने के लिए कहना उतना आसान थोड़ी ना था.

पानी के बाद चाय भी आई और मेडम ने चाय देते समय अपने बूब्स की गली दिखा के मेरा लंड भी खड़ा किया था, उसने गली दिखाने के बाद मेरे सामने देखा था. उसे पता था की मेरी नजर भी वही थी. वोह हंस पड़ी और बोली, होंशियार हो तुम, चलो जल्दी चाय पी लो…! जैसे ही मेरी चाय खत्म हुई मेडम ने अपनी साडी को खोला और उसने पहनी काली ब्रा मुझे दीखाई. उसने अब ब्रा पेंटी को छोड़ के सभी कपड़ो को उतार दिया और वोह सोफे के पास आई और मेरी गोद में आके बैठ गई, बैठते हुए मेडम बोली…एक घंटा हैं तुम्हारे पास. मेरे पति आ जायेंगे उसके बाद. मुझे एक घंटे में जितना ठोक सकते हो ठोक डालो. मैंने तुरंत मेडम की ब्रा की हुक खोल दी. मेडम के 34 साइज़ से भी बड़े स्तन हवा में झूलने लगे और मैंने लपक के मेडम के एक निपल को मुहं में दबाया. दुसरे निपल के ऊपर मैंने अपनी एक ऊँगली के ऊपर थूंक लगा के सहलाया. मेडम ने धीरे से हाथ निचे किया और गांड में फंसी पेंटी को उतारा. सुनीता मेडम की चूत बड़ी झांटो वाली थी और चूत का रंग घेरा गुलाबी था. मेडम के निपल्स को मैं बारी बारी चूसने लगा और मेडम भी मेरे लंड को पेंट के ऊपर से जोर जोर से दबा रही थी. मेरा जाट लंड चूत और गांड में जाने के लिए बिलकुल तैयार था.

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मेडम ने मेरी पेंट खोल दी थी और मेरा लंड अब मेडम के हाथ में झूल रहा था. मैंने मेडम के दोनों स्तन के निपल्स को चूस चूस के लाल कर दिया था और मेरी ऊँगली अब उनकी झांटोवाली चूत को खुजा रही थी. मेडम की चूत से तुरंत ही रस टपकने लगा था. मेडम अब बहुत कामुक हो चुकी थी और उसने मुझे कस के पकड़ा हुआ था. मैंने मेडम के होंठो से अपने होंठ लगा दिए और एक जोर का चुम्मा ले लिया. मेडम मुझे कस के चूस रही थी और साथ साथ में मेरे लंड को जैसे की मुठ मार रही हो वैसे हिला रही थी. मेडम को मैने कंधे से पकड़ा औ उसे उल्टा लिटा दिया. सुनीता मेडम की गांड में हलके हलके बाल निकले हुए थे जिसे उसने वेक्स करके निकाले हुए थे लेकिन फिर भी कुछ बाल मुझे दिख रहे थे. मैंने अपने फडफड होते लंड को सीधे मेडम की चूत के ऊपर रख दिया और मैंने पीछे से मेडम की गांड में ऊँगली करने लगा. गांड में ऊँगली करने से मेडम ऊँची नीची हो रही थी और हलके हलके मुस्कुरा रही थी. मैंने अपने लंड को मेडम की चूत के होंठो पर रखा और सीधे एक झटके में पेल दिया. मेडम जोर से आह करने लगी.

सुनीता मेडम अपनी गांड वाला हिस्सा हिला हिला के मेरे लंड के झटके अपनी चूत के अंदर ले रही थी. मैंने भी अपने मसल्स की सारी एनर्जी मेडम की चुदाई में लगा दी. मैं पसीने से तरबतर हो गया था लेकिन मेडम की चूत इतनी रसीली थी की मुझे थकान का बिलकुल भी अहेसास  नहीं हुआ. मेडम के कमर के ऊपर अपने दोनों हाथ रखे हुए मैं उसकी चूत के अंदर से जैसे की खेत में हेंडपम्प से पानी निकालते है बिलकुल वैसे उसकी चूत का रस निकाल रहा था. मेडम की चूत का रस मेरे लंड के उपर झाग के स्वरूप में चिपका हुआ था. मेडम को भी मेरे लंड से बहुत मजा आ रही थी तभी तो वो अपनी चूत के मसल्स जोर से दबाती थी और मेरे लंड को बहुत मजा कराती थी. मैंने मेडम की चूत को दस पन्द्रह तक मस्त चोदा. मुझे मेडम की गांड की चुदाई करने की बहुत इच्छा थी. मैंने मेडम की गांड के ऊपर अपने थूंक का एक जथ्था लगाया और उसे मलने लगा. मेडम भी समझ गई की गांड में हमला होने वाला हैं. मेडम गांड के अंदर सही तरह से लौड़ा लेने के लिए उलटी लेट गई और उसने अपने दोनों हाथ से गांड को फैला दिया. मेडम की गांड का छेद हल्का काले रंग का था और देखते ही उसके अंदर लंड देने की इच्छा जाग्रत हो चुकी थी. मैंने मेडम की गांड के अंदर जैसे ही लंड घुसेड़ने लगा मेडम की आह अह ओह चालू हो गई जो गांड में पूरा लंड देने तक चालू रही.

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जैसे ही मैंने गांड के अंदर पूरा लंड दे दिया मेडम ने भी अपनी गांड को टाईट कर दी. मुझे मेरे लंड के ऊपर बहुत प्रेशर आ रहा था क्यूंकि मेडम ने गांड को मस्त टाईट रखा था और वोह आगे पीछे भी होने लगी थी…क्या सभी बड़ी उम्र की आंटी और भाभियाँ गांड में लेने की सौकीन होती हैं…..!!! मैंने अभी तक मेरे से बड़ी चार पांच स्त्रियों के साथ सहवास किया था और मेरे गांड मारने का प्रतिशत सो फीसदी ही रहा था. सुनीता के झटके और दबाव के चलते मेरे लंड के ऊपर अजब कसाव महसूस हो रहा था. मैंने उसकी गांड को दोनों हाथ से दोनों तरफ से पकड़ा और मैंने ऊँचा हो होक उसके गांड में अपने डंडे को पेलने लगा. सुनीता मेडम आह आह ओह ओह करती रही और साथ साथ मेरे लंड से मजे लेती रही. कुछ दस मिनिट की गांड सम्भोग होने के बाद मेरे लंड से वीर्यरस निकल गया और मैंने सारा के सारा रस मेडम की गांड में ही छोड़ दिया….!

 

चुदाई के बाद मैं कपडे पहन रहा था तभी सुनीता मेडम ने निचे बैठ के मेरे लंड को एक बार और चूस लिया. मैंने भी जोर जोर से उसके मुहं में ही उसे चोद दिया. उसका पति किसी भी वक्त आ सकता था इसलिए मैंने तुरंत वहां से निकल गया. इस दिन के बाद तो सुनीता मेडम ने कितनी बार मेरे लंड को अपनी चूत में और गांड में लिया हैं. मेरे लिए भी हजारों रूपये जुटाना मुश्किल हैं इसलिए मैं टीचर बनने के लिए मेडम की चुदाई कर के उसे खुश रख रहा हूँ…….!!!

Aug 26, 2016Desi Story

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