लम्बी सैर से चुदाई की दौर तक

लम्बी सैर से चुदाई की दौर तक

मैं अपने छुट्टियों में हिल स्टेशन गया हुआ था वहाँ एक ऐसी लड़की से मुलाकात हुई की, मुझे Indian Sex Stories के घटना में उसके साथ चोदने का मौका मिलने वाला था..

हेलो दोस्तो,

मेरा नाम टुकटुक है और आपने मेरी पहली कहानियों को बहुत सराहा है, जिससे प्रेरित होकर मैं आप सबके सामने फिर से हाजिर हूँ।

आज भी मैं आपको मेरे जीवन के पहलू की बात बताता हूँ। चलिए मैं आपका ज़्यादा वक़्त ना लेते हुए अपने कहानी पर आता हूँ।

जिसे आज 5 साल बाद भी सोच कर दिल में कुछ कुछ होने लगता है। यह बात उस टाइम का है जब मैं 24 साल का था।

ऑफिस में एक लम्बी छुट्टी होने के कारण, मैं अपने एक जिगरी दोस्त के साथ लम्बी सैर पर निकाला। रास्ता पता था, मंज़िल खोजनी थी।

हमारे पास 4 दिन का लम्बा समय था अपने को तरोताजा करने के लिए। हम लोग अपनी कार से रात को 11 बजे निकल पड़े।

सोचा था कि किसी हिल स्टेशन पर जाकर कुछ आराम किया जाए। हम दोनों ने बियर का केरेट पहले ही ले लिया था।

एक छोटी सी फ्रिज में सारी बियर्स डाल कर हम लोग निकल पड़े। हम 100 किलोमिटर का सफ़र पूरा कर चुके थे।

उस टाइम तक हम लोगों ने 2-2 बियर खाली कर दी थी। हम लोगों को अब किसी ढाबे या रेस्टोरेंट की तलास थी, जहाँ हम लोग कुछ खा पी सके।

मुज़्ज़फरनगर गुजरने के बाद हमें एक अच्छा सा रेस्टोरेंट दिखाई पड़ा। हम लोगों ने अपनी गाड़ी पार्क की और दोनों ही विश्रामगृह में चले गए।

वहाँ मुँह हाथ धोकर, हम लोग खाने के टेबल पर बैठ कर वेटर को ऑर्डर लेने के लिए बुलाया और हमलोगों ने खाना ऑर्डर किया।

खाना खाने में मसगुल हो गए। कुछ ही देर में हमें तरकीबन सारा ऑर्डर किया हुआ खाना ख़त्म कर लिया।

उसके बाद वेटर को बुलाया खाने के बिल के लिए पर वेटर कहीं और व्यस्त था। इसलिए उसको आने में समय लग रहा था।

अब मैने सोचा कि रिसेप्शन काउंटर पर जाकर ही बिल दिया जाए। हम लोग रिसेप्शन काउंटर की और बढ़े ही थे, कि मेरी कमर पर मुझे कुछ गरम गरम महसूस हुआ।

कुछ ग़लत मत सोचिए! मेरी शर्ट पर गरम सब्जी गिर चुकी थी, और सब्जी को गिराने वाली एक लड़की थी। जो कि अपने दोस्तो के साथ एक टेबल पर खाना खा रही थी।

मुझे गुस्सा तो बहुत आया, पर मैं उस टाइम उस लड़की से कुछ ना कह पाया। कुछ ही देर में हम लोग पेशाब करने के बहाने विश्रामगृह से अपनी शर्ट को धोकर करके निकले।

शर्ट काफ़ी खराब हो चुकी थी, पर मेरे पास केबल एक ही विकल्प बचा था। गाड़ी में जाकर कपड़े बदल लिया जाए, यही सोच कर मैं बिल देने काउंटर पर पहुँचा।

वहाँ देखा, तो वही लड़की मेरे साथ काउंटर पर बिल दे रही थी, पर इस बार कुछ नया दिखा।

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वो अकेली लड़की नहीं थी दोस्तो में उसके साथ 4 लड़कियाँ और थी और एक लड़का। शायद, वो लोग भी लम्बी छुट्टियों पर किसी हिल्स स्टेशन पर जा रहे थे।

उस लड़की से मेरी नज़र फिर से मिली और उसने मुझे एक प्यारी सी मुस्कान दी। मैं भी मुस्कुरा कर उसका जवाब दिया। हम दोनों लोग बिल देकर अपनी अपनी मंजिल की तरफ निकल गए।

रात के 2:00 बज चुके थे, और अब हम हरिद्वार के रोड पर आगे बढ़ रहे थे।

हम लोगों ने ऋषिकेश जाने का योजना तय कर लिया था कि वहाँ जाकर हम लोग खरीदारी करेंगे।
हम लोग सुबह 4 बजे ऋषिकेश शहर में पहुँचे।

एक होटल की खोज करने लगे, किस्मत अच्छी थी हमारी! कि हमें पहले ही होटेल में कमरा खाली मिल गया। होटल में जाने के बाद हम लोग फ्रेश हुए।

हमे लोगों ने 2-3 घंटे सोने का फ़ैसला किया क्योंकि आधी रात की सफर के बाद शरीर थोड़ा थका हुआ था और ताजगी के लिए सोना ज़रूरी लग रहा था।

हम लोग दिन के 11 बजे सोकर जागे और फिर होटल से निकल कर खरीदारी करने के लिए निकल पड़े। हम एक दुकान पे पहुँचे और वहाँ जरुरी चीज़ें की खोज करने लगे।

हम लोग दूसरे दुकान पर पहुँचे और जाँच पड़ताल करने लगे, तभी कुछ लोग और उस दुकान पर चढ़े और वही चीज़ के लिए जाँच पड़ताल करने लगा।

वो लोग कोई और नहीं थे, वो वही लोग थे जो हमें रात में रेस्टोरेंट पर मिला थे। आज वो लड़की एक झीनी सी टी-शर्ट और कैपरी पहनी हुई थी।

सेक्स से चूर मैंने उस लड़की को देखा

एक बार फिर से हम दोनों की नजरें मिली, आँखों ही आँखों में हम दोनों ने एक दूसरे को ही बोला। हमारा खरीदारी तकरीबन पूरा हो चुका था।

हालांकि, वो लोग अभी भी कुछ मोल मोलाय कर रहे थे।

हम लोग बिल देकर अपनी बिल स्लिप लेकर निकल ही रहे थे कि पीछे से एक बहुत प्यारी आवाज़ ने मुझे रोका। जरा सुनिए- क्या मैं आप से एक मिनट बात कर सकती हूँ?

यह और कोई नहीं था, वही लड़की थी! जिसने मेरी शर्ट के ऊपर खाना गिराया था।

मैं रुका और पूछा – मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ ?

इस पर उसने बहुत ही प्यारे तरीके से मुस्कुराते हुए कहा- हम लोग दिल्ली से पहली बार आए है यहाँ खरीदारी के लिए!

हम लोगों को कुछ ज़्यादा पता नहीं है ना ही कोई अनुभव! अगर आपको कोई दिक्कत ना हो तो क्या हम लोग आप लोगों के साथ आ सकते है?

मैंने यह बात अपने दोस्तो से की और उसकी सहमति से मैंने बोला, कि अगर हम लोगों के ग्रुप की जगह एक है तो हम लोगों को कोई प्राब्लम नहीं है।

इतना कह कर हम लोग अपने होटल की तरफ बढ़ गए और जाने से पहले उस लड़की ने मेरा मोबाइल नंबर ले लिया था, जिससे कि वो हम लोगों से संपर्क कर सके।

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कैम्प के लिए हम लोगो को एक उचित जगह पर समल्लित होना था जो कि ऋषिकेश के आउटर में थी। हम लोग शाम 5 बजे उस जगह पहुँच गए।

वहाँ पहुँचे तो पता चला कि वो ग्रूप पहले से ही वहाँ इंतज़ार कर रहा था, फिर से उस लड़की की एक हसीन मुस्कान मुझ तक पहुँची।

बड़े ही अच्छे सलीके से उसने हेलो कहा और हाथ मिलाया। हमलोग एक टेंपो में एक साथ पहाड़ी रास्ते पे चल दिए, जहाँ हमारा कैम्प लगना था।

चुदासी नज़रों से मुझे देखा

उस ग्रूप से अब मेरी अच्छी बात हो रही थी। उस लड़की का नाम सोनम था और वो अपने दोस्त के कैम्पिंग के लिए आई थी।

सब लोग बड़े अच्छे से एक दूसरे से बात कर रहे थे। उसी ग्रूप में एक दूसरी लड़की जिसका नाम मोनिका था, मुझे बार बार मादक नज़रों से देख रही थी।

उसकी मुझसे बात करने की हिम्मत नहीं हो रही थी। बातों ही बातों में सोनम ने सभी लोगो का परिचय कराया।

तब जाकर पता चल कि जो अकेला लड़का है वो मोनिया का बॉयफ्रेंड है।

हम लोग अब अभी अपने पड़ाव पर पहुँच चुके थे। वहाँ हमारे गाइड ने हम लोगों को नाश्ता दिया और हम सब लोगों को अपने अपने कैम्प्स में जाने के लिए रास्ता दिखाया।

मेरे और मेरे दोस्त के कैम्प के बीच में 2 कैम्प्स और थे, पर अभी तक पता नहीं था कि वहाँ कौन आने वाला है अंधेरा अच्छा हो चुका है था।

मेरे एक साइड में मेरा दोस्त दूसरी साइड में मोनिका का बॉयफ्रेंड और उसके आस-पास उसके ग्रूप के बाकी सारी 4 लड़कियाँ बैठी थी।

तभी सोनम ने बोला- गाने सुनने से अच्छा हमलोग अन्तराछड़ी खेलते है। हम लोगों को उसमें कोई दिक्कत नहीं थी, हमलोग सब अन्तराछड़ी खेलने लगे।

हम लोग 2 ग्रुप्स में अलग अलग बात गए, मेरे ग्रूप में सोनम मेरा दोस्त और 2 लड़कियाँ और दूसरे ग्रूप में मोनिका उसका बॉयफ्रेंड और बाकी लड़कियाँ।

कुछ देर तो ठीक चला पर कुछ ही देर बाद कुछ दो शब्दी गाने की शुरुआत हो गई, जो कि मोनिका ने की थी और सोनम भी हम लोगों का साथ देने लगी।

काफ़ी दो शब्दी गाने को हम लोग गाते रहे, एसी बीच मेरे दोस्त को फ्रेश होने के लिए जाना पड़ा। वो बस कैम्प की ओर चल दिया और सोनम मेरे पास आ गई।

अब हम दोनों के बीच बस एक चादर का फासला था। मैं अपना पेग पी रहा था और वो अपने हाथ आग में सेक रही थी। शायद, उसे ज़्यादा सर्दी लग रही थी।

मैंने मज़ाक में पूछा कि सर्दी ज़्यादा लग रही है तो एक आध पेग लगा लो अच्छा लगेगा। उसने अपनी आँखें थोड़ी नीचे करते हुए ना कर दी।

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शायद, वो इशारा कर रही थी कि बाकी लोगों के सामने वो पीती नहीं है।

अब सोनम ने अपने हाथ को चादर के अन्दर कर लिया और चादर का एक किनारा मेरे जाँघ छूने लगा।

हालांकि, वो सिर्फ चादर नहीं था, वो सोनम का हाथ था और उसने अपना एक हाथ मेरी जाँघ पे रख दिया था।

रात जवान होती जा रही थी और मुझे हल्का सा सुरूर होने लगा था। धीरे धीरे बॉनफायर की आग हल्की पड़ रही थी।

अब सभी लोग आग के नज़दीक आते जा रहे थे, जिससे सबके बदन एक दूसरे से सट गए थे। सोनम का शरीर भी मुझसे पूरी तरह सट गया था।

नरम चूचियों को छूने का मजा

उसका बायाँ हाथ पूरा मेरी जाँघ पर आ चुका था और नज़दीकी इतनी बढ़ गई थी कि सोनम का बायीं चूची मेरी कोहनी से बार बार छू रहा था।

मैं कभी जानबूझ कर, कभी सोनम अपना शरीर मेरे शरीर से छू रही थी। मुझे वो पल बहुत अच्छा लग रहा था। उसका स्पर्श एकदम कमाल का था।

काफ़ी टाइम बीत जाने के बाद, हमारा गाइड हमारे पास आया और बोला कि खाना तैयार है। आप लोग जब चाहे तब खाना खा सकते है।

हम लोगो ने ओके! बोल कर उसे जाने दिया। शायद मोनिका को किसी और चीज़ का इंतज़ार था।

अब वो अपने बॉयफ्रेंड के पास जाकर कुछ बोली और दोनों उठकर जाने लगे और बोले कि उन्हें काफ़ी तेज भूख लग रही है, तो बाकी की लड़कियाँ उसके साथ हो ली।

हालांकि, सोनम मेरे पास बैठी रही मेरा दोस्त भी आकर हमारे सामने बैठा हुआ था।

अब वो बोलने लगा, कि हम लोगों को भी खाना खा कर आराम करना चाहिए क्योंकि सुबह 6 बजे उठकर हमें जॉगिंग के लिए जाना है,

अब मैं थोड़ा मुस्कुरा कर उससे बोला कि तुम जाओ, हम दोनों थोड़ी देर में खाना खाएंगे। वो समझ गया और वहाँ से चला गया।

अब मैं और सोनम अकेले आग के सामने बैठे थे, पहली बार सोनम ने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और पूछी कि जनाब आप अपने दोस्त के साथ खाना खाने क्यों नहीं गए?

मैंने जवाब दिया, कि जब तुम लड़की होकर अपने दोस्त को जाने दे सकती हो, तो मुझे भी कुछ उम्मीदें है। मुझे भी कुछ पल अकेले बिताने का मन है आपके साथ।

इतना सुनकर वो हँस दी और मेरी बाजू पर एक चुम्बन लेकर बोली कि कितनी भी देर में खाना खाने जाना हो तो अपने अपने कैम्प्स में है।

मैने बोला है, यही तो सही है कि सोना तो अपने अपने कैम्प्स में ही है, पर अगर तुम्हें एक दो पेग पीने है तो तुम मेरे कैम्प में आ सकती हो और हम लोग थोड़ा समय अकेले बिता सकते है।

क्या हुआ आगे? क्या मैं उसकी चुदाई कर पाया? जानिए कहानी के अगली कड़ी में!
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