सबिता भाबी को नंगा करके चोदा भाग

कहानी में अब तक अपने पढ़ा,  कि कैसे मैंने रमन का लंड का पकड़ा और किस तरह से वो मेरी चूत को चाट रहा था. अब आगे पढ़े…

रमन का कड़क लौड़े को दबाते ही, उसके मुह से भी सिसकारी निकल पड़ी और अह्ह्ह भाभी जी.. कह कर वो मेरी चूत को मसल रहा था. गौरांग मुझे सेक्स का मज़ा देता है, लेकिन पोर्न कॉमिक वाली सविता भाभी की तरह मुझे भी पराये मर्द कुछ एक्स्ट्रा मजा देते है. और ये पहला पराया लौड़ा नहीं था, जो मेरे हाथ में था

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मैं जैसे उस लंड का हस्त्मथुन कर रही थी. रमन के मुह से अहः अहहाह अहहाह निकल रही थी. अब मेरा बड़ा अरमान था, कि इस लौड़े को मैं अपने मुह में लू. रमन को धक्का दे कर मैंने उसे लेकर बाजु के कमरे में चली गयी. ये कमरा छोटा सा था, जिसके एक कोने में बेड था और बगल में एक छोटा सा टेबल था. रमन ने मुझे अपनी गोदी में उठाया और टेबल के ऊपर बैठा दिया. वो मेरी चूत को देख रहा था, कि मैंने बोला – रमन तुमने कभी चूत चाटी है?

नहीं भाभी जी, कभी नहीं.

तो फिर आज मैं तुम्हे चाटना सिखाती हु. आ जाओ.

मैंने अपनी बाहों को फैला दिया और रमन जैसे ही मेरे पास आया, मैंने अपनी टांगो को खोल कर उसको नीचे बैठा दिया. मेरी चूत की खुशबु वो सूंघ सकता था, इतने करीब था वो. मैंने उस से कहा – रमन धीरे से अपने होठो को मेरी चूत पर रखो और धीरे – धीरे चाटो. लेकिन देखो, काटना मत.

रमन ने ऊपर देखा और भाभी जी मैंने ये ब्लूफिल्म में देखा है.

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मैंने कुछ नहीं कहा और रमन ने अपनी जुबान मेरी चूत पर रख दी और जब उसकी जुबान मेरी चूत के राईट साइड वालो होठो पर लगी, तो मुझे एकदम से जन्नत का अहसास हुआ. मैंने उसके माथे को अपनी चूत के ऊपर दबा दिया और रमन अब किस मंझे हुए मेल पोर्नस्टार की तरह मेरी चूत को चाट रहा था. मेरे बदन पर इतना कूल मौसम में भी पसीने आ रहे थे. कमरे के पंखे भी ओन थे, फिर भी बदन में अन्दर से गर्मी छुट रही थी. मैं चुदासी होन लगी थी और रमन का बड़ा कड़क लौड़ा मेरे दिलो-दिमाग में घूम रहा था.

रमन मेरी चूत को कुत्ते की तरह से चाट रहा था और अब उसके हाथ मेरे कुलहो के ऊपर थे. वो मेरे गांड को दबा रहा था और मेरी चूत को कुत्ते की तरह से चाट रहा था. मैं झड़ने वाली थी. मैंने सोचा, कि क्यों ना अपनी चूत का पानी उसके मुह पर ही निकाल दू. और एक हलके से फव्वारे ने तभी रमन के मुह को भीगो दिया. कुछ बुँदे उसके होठो के नीचे चली गयी और बाकी की कुछ बुँदे उसके फेस पर लग चुकी थी. वो खड़ा हुआ और अपनी लंगोटी उतार कर अपने मुह को पूछने लगा. अब मेरा टाइम था, उसे खुश करने का.

अब मैंने रमन को बेड के ऊपर बेठने को कहा. उसका कड़क लौड़ा आसमान से बातें कर रहा था. मैं किसी हॉट रंडी के स्टाइल से अपने मुह को खोल कर उसके सामने बैठ गयी. रमन ने अपना लौड़ा मेरे मुह के सामने थमा दिया, जिस से चाट कर मैं सुख का आनंद ले रही थी. रमन ने मेरा माथा पीछे से पकड़ा और वो उसे अपने लंड के ऊपर दबा रहा था. हम दोनों ही पूरी तरह से हॉट हो चुके थे.

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अब वो मेरे मुह के अन्दर धक्के लगा रहा था और उसका लंड मेरे गले तक पहुच रहा था. दर्द हो रहा था, लेकिन गरम लौड़े को चूसने का मज़ा भी कुछ और ही था.

तभी रमन ने अपना लंड मेरे मुह से निकालना चाहा, तो मैंने उसको गुस्से भरी नज़र से देखा. तो उसने कहा – भाभी जी मेरा निकलने वाला है.

मैंने उसे अपनी आँख से ही इशारा किया, कि अन्दर ही निकाल दो. रमन के चेहरे पर उस वक्त ख़ुशी के अलग ही भाव थे. उसने अब मेरे मुह में जोर – जोर से अपने लौड़े को धक्का मारना शुरू कर दिया. और धक्के मारने के २ मिनट के बाद ही उसका दूध मलाई के जैसे उसके लंड का पानी निकल पड़ा और मेरे मुह पूरा का पूरा भर गया. मैं भी किसी छिनाल के जैसे उसका सारा का सारा पानी पी गयी. रमन बड़ा खुश था.

हम दोनों ही निढाल होकर पलंग पर लेट गए. रमन अपने हाथ से मेरे स्तन को दबा रहा था और निप्पल के ऊपर से मसाज भी दे रहा था. उसकी इन हरकतों में, मैं २ मिनट में फिर से तैयार हो गयी. अब की मैं उसके लौड़े को अपनी चूत में लेना चाहती थी. मैंने उसे बेड पर लेटे रहने को कहा. और उसका लौड़ा पकड़ कर अपनी चूत के छेद को उसके ऊपर सेट कर दिया. मेरी चूत पूरी तरह से गीली थी और लंड अपनी जगह ढूंढने लगा था. रमन को भी को भी उस चिपचिपाहट का अहसास हो गया था. उसने एक ही झटके में मेरी चूत के गहराई में अपने लौड़े को पेल दिया और मेरे मुह से मस्ती वाली अहहहा अहहः निकल पड़ी. मैं उसके गले लग गयी और एकदम चिपक सी गयी उसके साथ. रमन ने मुझे कमर से पकड़ा लिया और वो अपने लंड को मेरी चूत के अन्दर बाहर करने लगा.

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रमन का लौड़ा मेरी चूत की गहराई को खोद रहा था और मैं एकदम मस्ती वाली स्टाइल से अपनी गांड को उचका कर उसके साथ दे रही थी. सच में बहुत मज़ा आ रहा था उसके कड़क लंड के साथ चुदवाने में तो. मैं बस अपनी गांड को ऊपर – नीचे कर के हिचकोले ले ले कर चुदवा रही थी.

रमन ने मुझे तृप्त करने में कोई कमी नहीं बरती. उसने मुझे लंड पर काफी देर उछालने के बाद, घोड़ी बना कर भी मेरी चूत को चोदा. और जब दूसरी बार उसका वीर्य निकला, तो उस से मेरी पूरी चूत की सिंचाई हो गयी.

रमन और मैंने साथ में ही बाथ भी लिया और श्याम काका के आने से पहले ही वो वापस लकड़ी काटने के काम पर लौट गया. उसके ये चुदाई ने मुझे सच में सविता भाभी बना दिया. मैं जब तक वहां रही. अलग – अलग जगह पर वो मेरी चूत की प्यास को बुझाता रहा. सच में उसका कड़क लौड़ा किसी भी चूत को शांत कर सकता है

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