सिर्फ बेटी का ही नहीं मेरा भी पति

मैं शिवानी 38 साल की हु, अभी 6 महीने पहले ही मेरी बेटी की शादी हुई है. जींदगी मेरी और मेरी बेटी की बहुत ही अच्छी चल रही है. अब लोग मुझे बदचलन नहीं कहते, जब से मेरे पति का देहांत हुआ आज से दो साल पहले तब से पता नहीं लोग क्या क्या लांछन लगाया, पर मैं सब कुछ बर्दाश्त कर कर मैंने ज़िन्दगी काटी और अब बहुत बहुत ही ज्यादा खुश हु, मेरे प्यारे मित्रों मुझसे रहा नहीं गया इस वजह से मैं अपनी ख़ुशी को आपके साथ शेयर करने के लिए मैंने नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे अपनी कहानी लिख रही हु, आशा करती हु आपके लिए एक खूबसूरत सेक्स कहानी भेंट करूँ. अब मैं अपना और आपका समय बर्बाद नहीं करते हुए, अपने आपवीति और ख़ुशी के पल पे आती हु, कैसे कैसे मेरे ज़िन्दगी में मोड़ आया और मैं अपने दामाद की पत्नी बन बैठी.

दोस्तों ये कहानी नहीं बल्कि मेरी ज़िन्दगी है. दो साल पहले मेरे पति का देहांत हो गया, मेरी लहलहाती जवानी को भोगने बाला कोई नहीं बचा, कभी तो लगा की मेरी ज़िन्दगी ख़तम हो चुकी है. मैं दूसरी शादी करने के लिए सोची जो मुझे ठीक नहीं लगा क्यों की मेरे साथ मेरी एक जवान बेटी थी. तो मैं उसका भी ज़िन्दगी बर्बाद नहीं कर सकती. पता नहीं मेरा नया पति कैसा मिलता, इस वजह से मुझे डर लगा रहता था. मैं ये बात किसी को कह भी नहीं सकती. दोस्तों मैं बहुत ही सेक्सी थी. जैसा की हरेक की ज़िन्दगी के लिए खाना रोज जरूरी है उसी तरह मेरी भी ज़िन्दगी के लिए सेक्स जरूरी था. मैं सेक्स के बिना नहीं रह सकती थी. मैं करती भी क्या मन मसोस कर रह गई. मुझे लगा की पूजा की शादी कर दी जाये, मैंने एक चाल चली, मैं सोची की अगर पूजा की शादी अपने जान पहचान से रिश्ता लगवाई तो गड़बड़ हो जायेगा. मैंने सोचा की पूजा की शादी ऐसी जगह की जाये जिससे मेरा भी काम बन जाये.

ये सब सोच कर मैंने एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर पूजा की शादी का प्रोफाइल भेजी, पूजा बहुत ही ज्यादा स्मार्ट है, इस वजह से काफी रिश्ते आने लगे, मैं खुद रिश्ते को छांट छांट कर पूजा को दिखने लगी. और मुझे एक ऐसा लड़का मिल गया, जो की पूजा से १० साल बड़ा था और मेरे से दस साल छोटा मुझे लगा की ये परफेक्ट रिश्ता होगा, आपको तो पता है मेरे मन में कुछ और ही चल रहा था. उसपर से उस लड़का का आगे पीछे कोई नहीं था, माँ बाप का एकलौता संतान था पर उनके माँ बाप एक सड़क हादसे में दो साल पहले ही देहांत हो गया. मैंने उस लड़के से पहले मेल से फिर व्हाट्सप्प पे और फिर फ़ोन कर बात की. लड़का बहुत ही अच्छा लगा और थोड़ा सेक्सी भी लगा, उसके अंडरवियर पहने पोज़ को देखकर ही समझ गई की इसका खंडा बड़ा होगा, पूजा से ज्यादा मुझे ही जल्दी होने लगी और फिर शादी का तारीख तय हो गया.

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मैं आसनसोल में रहती थी और लड़का दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था. लड़का का भी शर्त था की मैं भी उसके पास चली जाऊं, वो कह रहा था की मुझे जीवन साथी के साथ साथ माँ भी मिल जाएगी, मुझे लगा की माँ कौन बनना चाह रहा था, मैं तो कुछ और ही बनना चाह रही थी. और एक दिन ऐसा आया की शादी हो गई और और हम तीनो दिल्ली के लिए रवाना हो गए. मैंने पूजा को और समीर को हानीमून पे भेज दी, और खुद अकेले रह गई. वो दोनों सात दिन बाद वापस आये, तो मैंने पूजा को देख कर ही समझ गई की पूजा खूब चुदी है. क्यों की पूजा का बूब्स थोड़ा और बड़ा बड़ा हो गया था गांड का उभार भी ज्यादा हो गया था. मुझे जलन होने लगी की जो सोच कर शादी करवाई थी उसका मजा तो अभी पूजा ही ले रही है.

दिन बीतता गया, पूजा को जॉब लग गई, अब वो सुबह आठ बजे जाती थी और रात को आठ बजे आती थी, और समीर का जॉब रात का था वो ९ बजे जाता था और फिर दिन में ही वापस आता था, हम सब परिवार सिर्फ शनिवार और रविबार को ही साथ होते थे, पर मैं तो दोनों के साथ होती थी. क्यों की मैं घर पर होती थी. एक दिन की बात है, पूजा को कंपनी ने दिल्ली से बाहर भेज था कुछ काम के लिए बंगलुरु चार दिन के लिए, तो मैं और शमरी दोनों घर पे थे, संडे का दिन था हम दोनों मूवी देख कर आये, तो समीर बोल की माँ जी बियर पिओगे, मैंने कह दिया ले लो, समीर बियर नहीं लाके वो व्हिस्की ले आया और चिकन, घर आकर पेग बनाया और मैंने खाना निकाली, तो मैंने पूछा तुमने तो बोल था बियर पर ये क्या है? तो उसने कहा मैंने कहा अरे आज मूड हो गया माँ जी, पूजा भी नहीं है. अगर आप बियर पि सकती हो तो व्हिस्की भी पि लोगी,

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उसके बाद हम दोनों के एक एक पेग पि, मैंने सूट में थी तो गर्मी ज्यादा लग रही थी इस वजह से मैंने कहा की मैं कपडे चेंज कर लेती हु, और मैंने स्लीवलेस नाइटी पहन ली, अंदर मैंने ब्रा नहीं पहनी और बाल को ऊपर बाँध ली, वापस आते ही, एक एक पेग का नशा था हम दोनों में, समीर देखते ही बोला क्या बात है माँ जी, क्या लग रही थी. मैंने कहा अच्छा? क्यों की मेरी चूचियाँ साफ़ साफ़ दिखई दे रही थी निप्पल साफ़ साफ़ नाइटी के ऊपर से पता चल रहा था, उसपर से भी नाइटी का गला ज्यादा कटा होने के कारण मेरे दोनों बूब्स के बिच का भाग दिखाई दे रहा था. समीर के मुह से शायद पानी टपक गया मेरी गदराये हुए शरीर को देखकर.

उसके बाद समीर ने फिर पेग बनाया और हम दोनों ने पि, मैं ज्यादा कभी पि नहीं थी, पति के साथ सिर्फ संडे के संडे पीती थी, आज मुझे काफी नशा हो गया था दो ही पेग में. मैं उठकर पेशाव करने गई. वापस आते ही टेबल से लग कर लड़खड़ा गई और गिरने लगी, तभी मुझे समीर ने सम्भाला, मैंने गिरते गिरते बची, समीर बचाने के चक्कर में मेरी चूचियों को पकड़ लिए, और मैं उसके बाहों में झूल गई. मेरे आँखे ऊपर निचे हो रही थी. समीर बोला की माँ जी आपको नशा आ गया है. चलो बैडरूम के सुला देता हु, उसने मुझे थामे हुए चलने लगा. मैं जब उसके बाहों में थी तभी मेरे अंदर एक अजीब सी सिहरन होने लगी. मैं समीर को गले लगा ली और होठ पर एक किश कर दिया, मैंने कहा समीर अगर तुम नहीं रहता तो मेरा क्या होता.

और समीर भी नशे में था उसने मुझे रोक नहीं और मैं उसके होठ को चूसने लगी. समीर का लण्ड खड़ा होने लगा क्यों की मेरे जांघ को टच कर रहा था, मेरे अंदर एक सुरूर सा होने लगा और फिर समीर मुझे अपनी बाहों में जकड लिया और मेरे गाल पे कंधे को चूमने लगा. मैंने उसके आगोश में आ गई. और मैं साथ साथ पलंग पे लेट गई. वो निचे था मैं ऊपर से उसके होठ को चूम रही थी और मेरी चूचियाँ उसके सीने पे रखा था. समीर ने कहा माँ जी हट जाओ, नहीं तो ये रिश्ता रिश्ता ना रहेगा और इसके आगे बढ़ जायेगा, मैंने कहा पिछले रिश्ते को ढोने कौन बैठा है समीर, मेरा जी कर रहा था पुराने रिश्ते को मिटा कर एक नए रिस्ते के तरफ चले, मैं भी अकेली बोर हो गई हु, समीर बोला पर माँ जी पूजा का? तो मैंने कहा मैं कहा मना कर रही पूजा के लिए, पर मुझे भी अपने दिल में जगह दे दो, तो समीर ने कहा माँ जी ये तो गलत है,

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मैंने कहा समीर गलत और सही तो सिर्फ हमलोग को पता है, गलत गलत तब होता है जब बाहर के लोग जान जाए, जो बात दबी है वो जायज होता है. और मैंने समीर के लण्ड को पकड़ ली, समीर भी मेरे चूच को थाम लिया और हौले हौले सहलाने लगा. और फिर मैंने अपना नाइटी उतार दी. और ऊपर विराजमान हो गई. मेरे चूचियों को देखकर समीर बोला वाओ, आज मैं धन्य हो गया, माँ और बेटी एक ही लण्ड से चूदेगी, मैंने कहा मेरी भी तो किस्मत है समीर की मैं अपने दामाद को आज से अपना पति का हक दूंगी.

और फिर समीर अपना सार कपड़ा उतार दिया, और मेरी चूत में ऊँगली करने लगा. और एक हाथ से मेरी चूचियों को दबाने लगा. मैं आह आह आह आह कर रही थी. वो मेरे चूत को चाटने लगा. उसने निचे से किश करते हुए ऊपर चढ़ा, और मेरे होठ पे अपना होठ रख दिया मैंने उसके लण्ड को पकड़ कर अपने चूत पे सेट की और उसने एक झटका दिया. और समीर का लण्ड मेरे चूत में समा गया, मैं धन्य हो गई उसके मोटे लण्ड को अपने चूत में पाके, मैं अपनी गांड उठा उठा के ऊपर निचे करने लगी. और समीर मेरे चूत में लण्ड जोरजोर से डालने लगा. मेरे मुह से सकून भरा आह निकल रहा था, दोस्तों कभी वो ऊपर मैं मैं ऊपर दोनों एक दूसरे के वासना को शांत की और झड़ गई. आप ये कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे पढ़ रहे है. उसके बाद समीर मेरे चूत में ही अपना सार वीर्य डाल दिया.

दोस्तों अब तो मैं समीर की दूसरी पत्नी हो गई हु, जब मेरी बेटी घर पर नहीं होती है तब मैं एजी कहती हु, और दिन में चुदवाती हु, मैं बहुत खुश हु, मेरे लिए रिश्ते का मतलब आज दूसरा है. मैं खुश हु,

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